Emergency की हालत में कोई सुनने वाला नही।

23 फ़रवरी 2019(शनिवार) की घटना है जिसमे हॉस्टल के छात्र सतिवा वांगु को देर रात से ही बुखार था,जो कि दिन में और भी गंभीर हो गया, हॉस्टल में first aid या paracetamol की एक गोली भी नही उपलब्ध कराई गई, छुट्टी होने के कारण डिस्पेंसरी भी बंद थी, एम्बुलेंस का ड्राइवर भी उपलब्ध नही था, वार्डन या अन्य अधिकारियों से मदद मांगने पर किसी भी प्रकार की सहायता नही मिली, अंत में कई शिक्षकों के हस्तक्षेप के बाद अधिकारी छात्र को निजी क्लीनिक ले गए, वहाँ उसका प्रार्थमिक उपचार ही किया गया। उसका इलाज करवाने वाला यहाँ कोई नही है इसलिए उसके घरवालों ने उसकी flight की टिकट करवा दी और वो अपने घर जम्मू जाकर इलाज करवाएगा।

इस घटना से विश्वविद्यालय की मेडिकल सुविधा की सच्चाई सामने आती है, अगर किसी विद्यार्थी को अचानक कुछ हो जाता है तो यहाँ उसे बचाने के लिए उचित व्यवस्ता है ही नही। इमरजेंसी में कोई भी यहाँ सुनने के लिए तैयार नही होता, यही हैं आपके ymca के बड़े अधिकारियों का रवैया।
प्रशासन को इस मामले पर कार्यवाही करनी चाहिए एवं 24×7 मेडिकल की सुविधा आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखकर देनी चाहिए।

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